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मूक फिल्म देखने का एक उपाय यह है कि आप टेलीविजन की आवाज बंद करके फिल्म देखें। उसकी कहानी को समझने का प्रयास करें और अनुमान लगाएं कि फिल्म में संवाद और दृश्य की हिस्सेदारी कितनी है?

जब हम टेलीविजन की आवाज बंद करके फिल्म देखते हैं और कहानी का अनुमान लगाते हैं तो पाते हैं कि संवाद और दृश्य एक-दूसरे के बिना अधूरे से लगते हैं। संवाद के अभाव में फिल्म की कहानी समझ पाना कितना कठिन लगता है। वास्तव में संवाद और दृश्य एक-दूसरे के पूरक बनकर दृश्य या फिल्म को मनोरंजक बनाते हैं।

दृश्यों में संवाद की आवश्यकता के कारण ही मूक सिनेमा की लोकप्रियता के युग में भी सवाक् फिल्में इतनी लोकप्रिय हुई कि दर्शकों की भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया।


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डब फिल्म’ किसे कहते हैं? कभी कभी डब फिल्मों में अभिनेता के मुंह खोलने और आवाज में अंतर आ जाता है। इसका कारण क्या हो सकता है?

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किसी मूक सिनेमा में बिना आवाज के ठहाकेदार हंसी कैसी दिखेगी? अभिनय करके अनुभव कीजिए।

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सवाक्’ शब्द ‘वाक्’ के पहले ‘स’ लगाने से बना है। ‘स’ उपसर्ग से कई शब्द बनते हैं। निम्नलिखित शब्दों के साथ ‘स’ का उपसर्ग की भांति प्रयोग करके शब्द बनाएं और शब्दार्थ में होनेवाले परिवर्तन को बताएं:

हित, परिवार, विनय, चित्र, बल, सम्मान।


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उपसर्ग और प्रत्यय दोनों ही शब्दांश होते हैं। वाक्य में इनका अकेला प्रयोग नहीं होता। इन दोनों में अंतर केवल इतना होता है कि उपसर्ग किसी भी शब्द में पहले लगता है और प्रत्यय बाद में। हिंदी के सामान्य उपसर्ग इस प्रकार है: अ/अन, नि, दु, क/कु, स/सु, अध, बिन, औ आदि।

पाठ में आए उपसर्ग और प्रत्यय युक्त शब्दों के कुछ उदाहरण नीचे दिए जा रहे हैं:



इस प्रकार के 15-15 उदाहरण खोजकर लिखिए और अपने सहपाठियों को दिखाइए।