निर्धनता के बाद मिलने वाली संपन्नता का चित्रण कविता की अंतिम पंक्तियों में वर्णित है। उसे अपने शब्दों में लिखिए।
श्री कृष्ण की कृपा से सुदामा की दरिद्रता दूर हो गई थी। निर्धनता के बाद मिलने वाली संपन्नता देख खुद सुदामा भी हैरान थे। जहां उनकी झोपड़ी हुआ करती थी, वहां आज राजमहल खड़ा है। जहां पहले पैरों में पहनने के लिए चप्पल तक नहीं थी, वहाँ अब उनके पास घूमने के लिए हाथी घोड़े आदि उपलब्ध हो गए थे। गरीबी के दिनों में उनके पास सोने के लिए कठोर भूमि थी और अब शानदार नरम-मुलायम बिस्तर, पहले उनके पास खाने के लिए चावल तक नहीं होते थे और आज खाने के लिए मनचाही चीजें उपलब्ध थीं लेकिन अब उन्हें यह सब अच्छे नहीं लगते। इस तरह सुदामा की जिंदगी में विपन्नता के लिए कोई स्थान नहीं बचा था।
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