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कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।

विपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।


इस दोहे में रहीम ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है। इस दोहे से सुदामा चरित की समानता किस प्रकार दिखती है? लिखिए।


इस दोहे के माध्यम से कवि कहते हैं कि जब तक एक व्यक्ति के पास धन होता है तब तक ही लोग उसके अपने होते हैं। ऐसा इंसान कभी किसी का मित्र नहीं हो सकता। मुश्किल की घड़ियों में आपका साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है क्योंकि उसके व्यक्तित्व में स्वार्थ का भाव नहीं छिपा होता। यद इस दोहे की तुलना हम सुदामा चरित से करें तो इसमें काफी समानता देखने को मिलती है। सुदामा चरित में भी श्रीकृष्ण अपने प्रिय मित्रों को देखकर खुश हो जाते थे। कृष्ण उनके सम्मान में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ते। उनका व्यवहार देख मित्रों को यह महसूस हीं नहीं होता कि वे द्वारकाधीश के सामने बैठे हैं। इसमें श्रीकृष्ण ने अपने गरीब दोस्त सुदामा के प्रति ऐसा व्यवहार दिखाया कि लोग सदियों से उनके आचरण और दोस्ती की मिसाले देते रहे हैं।


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उच्च पद पर पहुँचकर या अधिक समृद्ध होकर व्यक्ति अपने निर्धन माता-पिता, भाई-बंधुओं से नजर फेरने लग जाता है ऐसे लोगों के लिए सुदामा चरित कैसी चुनौती खड़ी करता हैं? लिखिए।

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अनुमान कीजिए यदि आपका कोई अभिन्न मित्र आपसे बहुत वर्षों बाद मिलने आए तो आपको कैसा अनुभव होगा?

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पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए।

ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढि़ए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से अतिशयोक्ति अलंकार का एक उदाहरण छाँटिए।


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इस कविता को एकांकी में बदलिए और उसका अभिनय कीजिए।