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अनुमान कीजिए यदि आपका कोई अभिन्न मित्र आपसे बहुत वर्षों बाद मिलने आए तो आपको कैसा अनुभव होगा?

यदि हमारा कोई घनिष्ठ मित्र कई दिनों बाद हमसे मिलने आए तो हमें बड़े आदर और सम्मान के साथ उसका स्वागत करना चाहिए। इस मुलाकात में हमारा व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि सामने वाले को बिल्कुल हमारे व्यक्तित्व में ईर्ष्या का भाव न झलके। हमें उस दोस्त से मिलकर दोगुनी खुशी होनी चाहिए। उसके आदर-सत्कार में किसी प्रकार की कोई कमी न आ जाए इसका हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए। मुझे उसकी हर संभव मदद करने के लिए तैयार रहना चाहिए| उसकी मदद करने के बाद मैं घर से उसे प्रेमपूर्वक विदा करुंगा और आगे भी घर आते रहने के लिए कहूंगा।


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द्रुपद और द्रोणाचार्य भी सहपाठी थे। उनकी मित्रता और शत्रुता की कथा महाभारत से खोजकर सुदामा के कथानक से तुलना कीजिए।

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उच्च पद पर पहुँचकर या अधिक समृद्ध होकर व्यक्ति अपने निर्धन माता-पिता, भाई-बंधुओं से नजर फेरने लग जाता है ऐसे लोगों के लिए सुदामा चरित कैसी चुनौती खड़ी करता हैं? लिखिए।

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कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।

विपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।


इस दोहे में रहीम ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है। इस दोहे से सुदामा चरित की समानता किस प्रकार दिखती है? लिखिए।


1

पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोए।

ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढि़ए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से अतिशयोक्ति अलंकार का एक उदाहरण छाँटिए।