Q2 of 14 Page 72

उच्च पद पर पहुँचकर या अधिक समृद्ध होकर व्यक्ति अपने निर्धन माता-पिता, भाई-बंधुओं से नजर फेरने लग जाता है ऐसे लोगों के लिए सुदामा चरित कैसी चुनौती खड़ी करता हैं? लिखिए।

इसमें कोई दो राय नहीं कि वक्त के साथ रिश्तों में खटास पड़ने लगी है। मौजूदा समय में इंसान सफल और समृद्ध होने के बाद अपने निर्धन माता-पिता और भाई-बंधुओं से नजर फेरने लगता है। सुदामा चरित ऐसे व्यक्तित्व वाले इंसानों पर प्रश्नचिह्न लगाती है। अत्यधिक सुख-समृद्धि और पैसा आने के बाद इंसान को अपने निर्धन माता-पिता का निरादर नहीं करना चाहिए। उन्होंने न सिर्फ हमें जन्म दिया, बल्कि हमें बड़ी मुश्किलें में पाला-पोसा भी है| हमारी कामयाबी के पीछे उनकी कड़ी मेहनत छिपी है। हमारे सफल होने के पीछे भाई-बंधुओं का भी समान योगदान है। उनकी अच्छी एवं तर्कसंगत राय ने हमेशा हमारा बेहतर मार्गदर्शन किया है। हमें कृष्ण सुदामा की घनिष्ठ मित्रता से प्रेरित होकर हमें अपने माता-पिता और भाई-बंधुओं की मदद करनी चाहिए। ताकि हमारे सहारे से उनकी जीवन की नैया भी पार लग सके।


More from this chapter

All 14 →