किसी कारीगर से बातचीत कीजिए और परिश्रम का उचित मूल्य नहीं मिलने पर उसकी प्रतिक्रिया क्या होगी- ज्ञात कीजिए और लिखिए।
घर से थोड़ी ही दूर पर एक दर्जी की दुकान है। वहां काम करने वाले कारीगर का काम पूरे मोहल्ले में मशहूर है। लोग दूर-दूर से उससे कपड़े सिलवाने आते हैं। वह अपने काम के उचित मूल्य बताता है। एक बार मेरे दोस्त के पिता जी उसके पास पैंट सिलवाने के लिए गए। उसने रसीद में सिलाई का मूल्य लिखकर दे दिया। जब दोस्त के पापा पैंट उठाने गए तो उन्होंने पहनकर जांची। दर्जी ने हमेशा की तरह अपना काम अच्छे से किया था। दोस्त के पापा खुश भी हुए। लेकिन पैसे देते वक्त वो उसे 50 रुपए कम दे रहे थे। इस पर दर्जी ने रसीद में लिखे पैसे फिर से दिखाए। दोस्त के पापा भी फिर से आने की दलील देकर पैसे कम करवाए जा रहे थे। दर्जी को गुस्सा आ गया और उसने कहा कि आप मुफ्त में ले जाओ और एक भी पैसा मत दो। हमने तो अपना काम ईमानदारी से किया और अब आप पैसे देने में आनाकानी कर रहे हैं। काफी बहस के बाद दोस्त के पापा ने उसे पूरे पैसे दिए। तब जाकर दर्जी भी खुश हुआ।
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