गवरइया के स्वभाव से यह प्रमाणित होता है कि कार्य की सफलता के लिए उत्साह आवश्यक है। सफलता के लिए उत्साह की आवश्यकता क्यों पड़ती है, तर्क सहित लिखिए।
किसी भी बस्तु को पाने के लिए उस बस्तु की चाह अथवा उत्साह का होना जरूरी है। गवरइया के मन में बस एक बार ही टोपी पहनने का ख्याल आया था। उसने सोच लिया था कि चाहे जो भी हो जाए वो टोपी तो पहनकर रहेगी। तभी घूरे पर चुगते हुए रुई का फाहा भी मिल गया। उसने सोचकर एक कदम बढ़ा दिया था। अगली मंजिल उसे अपने आप मिलती चली गई। गवरइया में टोपी पहनने का उत्साह था। वो गवरे के कहने पर नीरस नहीं हुई। उसने अपनी इच्छा को जगाए रखा। धुनिये, कोरी, बुनकर और दर्जी ने काम करने से ना भी किया लेकिन गवरइया ने उन्हें अच्छा प्रस्ताव देकर मना लिया। आखिरकार वो एक टोपी की मालकिन बन गई।
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