Q3 of 12 Page 128

चारों कारीगर राजा के लिए काम कर रहे थे। एक रजाई बना रहा था। दूसरा अचकन के लिए सूत कात रहा था। तीसरा धागा बुन रहा था। चौथा राजा की सातवीं रानी की दसवीं संतान के लिए झबले सिल रहा था। उन चारों ने राजा का काम रोककर गवरइया का काम क्यों किया?

जब गवरइया अपनी टोपी बनवाने के लिए धुनिया, कोरी, बुनकर और दर्जी के पास गई तो उसे सभी ने यही कहा कि वे राजा का काम कर रहे हैं। गवरइया ने धुनिये को आधी रुई रख लेने की बात कही तो वह राजा का काम छोड़कर उसका काम करने को तैयार हो गया। इसी तरह कोरी, बुनकर ओर दर्जी ने भी गवरइया से काम का उचित दाम प्राप्त करने का दावा पाकर राजा के काम की जगह गवरइया के काम को प्राथमिकता दी| इसकी सबसे बड़ी वजह यह थी कि राजा उन्हें उनके काम का उचित मूल्य नहीं दे रहा था। वहीं गवरइया ने सभी कारीगरों को उम्मीद से ज्यादा एवं उचित मूल्य इमानदारी से देने की बात कही। इस पर वे गवरइया का काम पहले करने के लिए तैयार हुए।


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टोपी पहनकर गवरइया राजा को दिखाने क्यों पहुँची जबकि उसकी बहस गवरा से हुई और वह गवरा के मुँह से अपनी बड़ाई सुन चुकी थी। लेकिन राजा से उसकी कोई बहस हुई ही नहीं थी। फिर भी वह राजा को चुनौती देने को पहुँची। कारण का अनुमान लगाइए।

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यदि राजा के राज्य के सभी कारीगर अपने-अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे होते तब गवरइया के साथ उन कारीगरों का व्यवहार कैसा होता?

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गाँव की बोली में कई शब्दों का उच्चारण अलग होता है। उनकी वर्तनी भी बदल जाती है। जैसे गवरइया ‘गौरैया’ का ग्रामीण उच्चारण है। उच्चारण के अनुसार इस शब्द की वर्तनी लिखी गई है।

फुँदना, ‘फुलगेंदा’ का बदला हुआ रूप है। कहानी में अनेक शब्द हैं जो ग्रामीण उच्चारण में लिखे गए हैं, जैसे- मुलुक-मुल्क, खमा-क्षमा, मजूरी- मजदूरी, मल्लार-मल्हार इत्यादि। आप क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होने वाले कुछ ऐसे शब्दों को खोजिए और उनका मूल रूप लिखिए, जैसे- टेम-टाइम, टेसन/टिसन-स्टेशन।


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मुहावरों के प्रयोग से भाषा आकर्षक बनती है। मुहावरे वाक्य के अंग होकर प्रयुक्त होते हैं। इनका अक्षरशः अर्थ नहीं, बल्कि लाक्षणिक अर्थ लिया जाता है। पाठ में अनेक मुहावरे आए हैं। टोपी को लेकर तीन मुहावरे हैं, जैसे कितनों को टोपी पहनानी पड़ती है। शेष मुहावरों को खोजिए और उनका अर्थ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।