नदियों को माँ मानने की परंपरा हमारे यहाँ काफी पुरानी है। लेकिन लेखक नागार्जुन उन्हें और किन रूपों में देखते हैं?
भारत में नदियों को मां का दर्जा दिया गया है। हम अक्सर गंगा को मां कहकर संबोधित करते हैं। वहीं लेखक ने नदियों को बेटी, मौसी, दादी, बहन, प्रेयसी, दादी, मामी और मां के रूप देखा है। क्योंकि नदी बहन की तरह अल्हड़ लीलाएं करती है। वहीं हिमालय नदी रूपी बेटियों का पिता है जो उन्हें अपने अंदर समाए हुए है। साथ ही लेखक नदियों को दादी, मामी, मां और मौसी समझकर उनकी गोद में सो जाना चाहता है।
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