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अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण-

(क) संभ्रात महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं।


(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।


अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।


(1) सागर की हिलोर की भांति उसका यह मादक गान गली भर के मकानों में इस ओर से उस ओर तक लहराता हुआ पहुँचता और खिलौनेवाला आगे बढ़ जाता।

(2) लाल किरण-सी चोंच खोलते, चुगते तारक अनार के दाने|


(3) लाल कण बनावट में बालूशाही की तरह ही होते हैं।


(4) रक्त के तरल भाग प्लाज्मा में एक विशेष किस्म की प्रोटीन होती है तो रक्तवाहिका की कटी-फटी दीवार में मकड़ी के जाल के समान एक जाला बुन देती है|


(5) यह स्थिति चित्रा जैसी अभिमानिनी माजोरी के लिए ही कही जायेगी|


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1

प्रस्तुत लेख में नदियों के दृश्य-वर्णन पर बल दिया गया है। किसी नदी की तुलना अल्हड़ बालिका से कैसे की जा सकती है? कल्पना कीजिए।

2

नदियों से होने वाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए।

2

निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएं भी मानो जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे-

(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।


(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।


पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूंढि़ए।


3

पिछली कक्षा में आप विशेषण और उसके भेदों से परिचय प्राप्त कर चुके हैं। नीचे दिए गए विशेषण और विशेष्य (संज्ञा) का मिलान कीजिए-