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प्रस्तुत लेख में नदियों के दृश्य-वर्णन पर बल दिया गया है। किसी नदी की तुलना अल्हड़ बालिका से कैसे की जा सकती है? कल्पना कीजिए।

कवि ने नदी का बहुत अच्छा उल्लेख किया है। उसने नदी को बेटी की संज्ञा दी है और हिमालय को उसका पिता कहा है। जिस प्रकार पिता एक बेटी को जन्म देता है उसी तरह नदियां भी हिमालय की गोद से निकलती हैं। हिमालय के करीब रहने पर वो उसके साथ खेलती हैं, इठलाती हैं, खिलखिलाती हैं। हिमलाय एक पिता की तरह उनको हर वो चीज देता जिनकी उसे जरूरत होती है। जैसे ज्यादा से ज्यादा जल और शीतलता। हिमालय से निकलने के पश्चात नदी हिमालय पर उछलती, कूदती है जैसे कोई अल्हण बालिका हमेशा उछलती कूदती रहती है| उसके पश्चात जब वह बालिका बड़ी होती है और वह पिता का घर छोड़ते हुए गंभीर हो जाती है उसी तरह नदियां भी हिमालय से निकलकर जब समतल जमीन पर बहती हैं तो गंभीर और शांत दिखती हैं।


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यह लेख 1947 में लिखा गया था। तब से हिमालय से निकलनेवाली नदियों में क्या-क्या बदलाव आए हैं?

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अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?

2

नदियों से होने वाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए।

1

अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण-

(क) संभ्रात महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं।


(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।


अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।