प्रस्तुत लेख में नदियों के दृश्य-वर्णन पर बल दिया गया है। किसी नदी की तुलना अल्हड़ बालिका से कैसे की जा सकती है? कल्पना कीजिए।
कवि ने नदी का बहुत अच्छा उल्लेख किया है। उसने नदी को बेटी की संज्ञा दी है और हिमालय को उसका पिता कहा है। जिस प्रकार पिता एक बेटी को जन्म देता है उसी तरह नदियां भी हिमालय की गोद से निकलती हैं। हिमालय के करीब रहने पर वो उसके साथ खेलती हैं, इठलाती हैं, खिलखिलाती हैं। हिमलाय एक पिता की तरह उनको हर वो चीज देता जिनकी उसे जरूरत होती है। जैसे ज्यादा से ज्यादा जल और शीतलता। हिमालय से निकलने के पश्चात नदी हिमालय पर उछलती, कूदती है जैसे कोई अल्हण बालिका हमेशा उछलती कूदती रहती है| उसके पश्चात जब वह बालिका बड़ी होती है और वह पिता का घर छोड़ते हुए गंभीर हो जाती है उसी तरह नदियां भी हिमालय से निकलकर जब समतल जमीन पर बहती हैं तो गंभीर और शांत दिखती हैं।
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