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नदियों से होने वाले लाभों के विषय में चर्चा कीजिए और इस विषय पर बीस पंक्तियों का एक निबंध लिखिए।

भारत में नदी को जीवनदायिनी कहा जाता है यानी जीवन देने वाली। नदी का जल ही पूरी मानव प्रजाति की प्यास बुझाता है। नदी बर्फीले पहाड़ों से निकलती हैं और लंबा रास्ता तय कर शहरों-गांवों तक पहुंचती हैं। नदियों का पानी शीतल और गुणकारी होता है। इसको पीने से कोई भी बीमारी ठीक हो जाती है। नदियों से लोगों की धार्मिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। जीवदायिनी होने के कारण हम इसे मां कहकर भी पुकारते हैं। साथ ही समय समय पर इसकी पूजा भी करते हैं। नदी के पानी से किसान अपने खेतों की सिंचाई करते हैं। बड़े बड़े उद्योगों में भी नदी के पानी का प्रयोग किया जाता है। नदी में बांध बनाकर पानी एकत्रित किया जाता है और फिर उसी पानी को बिजली उत्पादन और सिंचाई के किये प्रयोग किया जाता है|

नदी मछुआरों को रोजगार भी प्रदान करती है। नदियों से मछलियां निकालकर वो अपने परिवार को पालते हैं। नदी के पानी से शरीर का इलाज भी होता है। उसमें मौजूद वनस्पतियां किसी भी बीमारी को दूर करने में कारगर हैं। बहती हुई नदी को देखना सुकून भरा होता है। ना जाने कितने कवियों ने नदी पर लेख और कविताएं लिख डालीं। नदी पर्यटकों को खूब लुभाती हैं। नदी में इतना सबकुछ होने के बाद भी आज मानव ने अपने स्वार्थ के कारण इसे प्रदूषित कर दिया है। नदियों का स्वरूप बदलता जा रहा है। ज्यादा गर्मी होने के कारण नदियों का जल सूख रहा है। धीरे धीरे पूरे विश्व में पानी की कमी आ रही है। धीरे धीरे ये स्थिति भयानक होती जा रही है। अगर मानव ने खुद को नहीं रोका तो आने वाली पीढ़ी को नदी और उसका पानी कभी नसीब नहीं होगा।


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अपने संस्कृत शिक्षक से पूछिए कि कालिदास ने हिमालय को देवात्मा क्यों कहा है?

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प्रस्तुत लेख में नदियों के दृश्य-वर्णन पर बल दिया गया है। किसी नदी की तुलना अल्हड़ बालिका से कैसे की जा सकती है? कल्पना कीजिए।

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अपनी बात कहते हुए लेखक ने अनेक समानताएँ प्रस्तुत की हैं। ऐसी तुलना से अर्थ अधिक स्पष्ट एवं सुंदर बन जाता है। उदाहरण-

(क) संभ्रात महिला की भांति वे प्रतीत होती थीं।


(ख) माँ और दादी, मौसी और मामी की गोद की तरह उनकी धारा में डुबकियाँ लगाया करता।


अन्य पाठों से ऐसे पाँच तुलनात्मक प्रयोग निकालकर कक्षा में सुनाइए और उन सुंदर प्रयोगों को कॉपी में भी लिखिए।


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निर्जीव वस्तुओं को मानव-संबंधी नाम देने से निर्जीव वस्तुएं भी मानो जीवित हो उठती हैं। लेखक ने इस पाठ में कई स्थानों पर ऐसे प्रयोग किए हैं, जैसे-

(क) परंतु इस बार जब मैं हिमालय के कंधे पर चढ़ा तो वे कुछ और रूप में सामने थीं।


(ख) काका कालेलकर ने नदियों को लोकमाता कहा है।


पाठ से इसी तरह के और उदाहरण ढूंढि़ए।