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सन् 1935-40 केलगभग लेखिका का बचपन शिमला में अधिक दिन गुजरा। उन दिनों के शिमला के विषय में जानने का प्रयास करो।

लेखिका ने अपने पाठ में शिमला की जिस छवि को दर्शाने की कोशिश की है उसे समझकर इतना जरूर कहा जा सकता है कि वह बहुत सुंदर रहा होगा। आज के शिमला में फिर भी आधुनीकरण हो गया है लेकिन तब शिमला आधुनीकरण से दूर होगा। मन मोहक वादियां, दूर दूर तक हरियाली, पहाड़ों के पीछे से निकलता सूरज, रात में टिमटिमाते छोटे बल्ब वहां की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं।


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1

लेखिका को बचपन में हवाई जहाज की आवाजें, घुड़सवारी, ग्रामोफोन और शोरूम में शिमला-कालका ट्रेन का मॉडल ही आश्चर्यजनक आधुनिक चीजें थीं। आज क्या-क्या आश्चर्यजनक आधुनिक चीजें तुम्हें आकर्षित करती हैं? उनके नाम लिखो।

2

अपने बचपन की कोई मनमोहक घटना याद करके विस्तार से लिखो।

2

लेखिका ने इस संस्मरण में सरवर के माध्यम से अपनी बात बताने की कोशिश की है, लेकिन सरवर का कोई परिचय नहीं दिया है। अनुमान लगाओ कि सरवर कौन हो सकता है?

1

क्रियाओं से भी भाववाचक संज्ञाएँ बनती हैं। जैसे मारना से मार, काटना से काट, हारना से हार, सीखना से सीख, पलटना से पलट और हड़पना से हड़प आदि भाववाचक संज्ञाएँ बनी हैं। तुम भी इस संस्मरण से कुछ क्रियाओं को छाँटकर लिखो और उनसे भाववाचक संज्ञा बनाओ।