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हमारे देश में तरह-तरह के भोजन, तरह-तरह की पोशाकें प्रचलित हैं। कक्षा के बच्चे और शिक्षक इनके विविध रूपों के बारे में बातचीत करें।

हमारा देश अनेकता में एकता वाला देश है। भारत में कुल 29 राज्य हैं और सभी राज्यों की बोली-भाषा, पहनावा, रहन-सहन एक दूसरे से एकदम अलग है। गुजरात में गुजराती भाषा बोली जाती है तो वहां के पहनावे में घाघरा चोली अहम है। खाने में गुजराती खाना जैसे –ढोकला, खाखरा प्रचलित है। वहीं उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो वहां पर हिंदी भाषा का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें भी आपको भिन्नता देखने को मिलेगी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की बात करें तो यह अदब की नगरी के नाम से मशहूर है। दिल्ली में जहां तू-तड़ाक बोली बोली जाती है तो वहीं लखनऊ में अवधी भाषा का प्रचलन है। यहां पर लोग अपने आप को भी हम कहकर बुलाते हैं। छोटा हो या फिर बड़ा सभी को आप कहकर बात करते हैं। इस तरह से 29 राज्य में अलग-अलग वेष-भूषा और बोली देखेने को मिलेगी।


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कपड़ों में मेरी दिलचस्पियाँ मेरी मौसी जानती थीं। इस वाक्य में रेखांकित शब्द दिलचस्पियाँ और मौसी संज्ञाओं की विशेषता बता रहे हैं, इसलिए ये सार्वनामिक विशेषण हैं। सर्वनाम कभी-कभी विशेषण का काम भी करते हैं। पाठ में से ऐसे पाँच उदाहरण छाँटकर लिखो।

1

अगर तुम्हें अपनी पोशाक बनाने को कहा जाए तो कैसी पोशाक बनाओगे और पोशाक बनाते समय किन बातों का ध्यान रखोगे? अपनी कल्पना से पोशाक का डिशाइन बनाओ।

2

तीन-तीन के समूह में अपने साथियों के साथ कपड़ों के नमूने इकट्ठा करके कक्षा में बताओ। इन नमूनों को छूकर देखो और अंतर महसूस करो। यह भी पता करो कि कौन-सा कपड़ा किस मौसम में पहनने के लिए अनुकूल है।

3

हथकरघा और मिल के कपड़े बनाने के तरीकों के बारे में पता करो। संभव हो तो किसी कपड़े के कारखाने में जाकर भी जानकारी इकट्ठी करो।