दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था-‘‘तैं सरबउला बोल जिन्नगी में कब देखले लोट?---!’’ दुलारी के इस आपेक्ष में आज के युवा वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
कजली दंगल के दौरान प्रतियोगी एक दुसरे को ललकारकर एक दूसरे को चुनौती देते थे| इसी दौरान 16 वर्षीय टुन्नू ने दुलारी को ललकारते हुए कहा ‘‘रनियाँ ले --- {--- {--- परमेसरी लोट’’ (प्रामिसरी नोट) तो उत्तर में दुलारी ने कहा- तै सर बउला बोल जिन्नगी में कब देखले लौट? दुलारी के ऐसा कहने के पीछे यह कारण था कि टुन्नू अभी 16 वर्ष का था और उसने अभी दुनिया नहीं देखी थी| दुलारी यह कहना चाहती थी कि टुन्नू बढ़-चढ़कर मत बोल, तूने लोट(पैसे) कहाँ देखें हैं अभी तो तूँ 16 वर्ष का ही है| टुन्नू के पिताजी भी यजमानी करते थे और बड़ी मुश्किल से अपनी गृहस्थी चला पाते थे| उसके ऐसा कहने के पीछे यही कारण था|
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