जलाए जाने वाले विदेशी वस्त्रों के ढेर में अधिकांश वस्त्र फटे-पुराने थे परंतु दुलारी द्वारा विदेशी मिलों में बनी कोरी साड़ियों का फेंका जाना उसकी किस मानसिकता को दर्शाता है?
आजादी के दीवानों की एक टोली जलाने के लिए विदेशी वस्त्रों का संग्रह कर रही थी। विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार आन्दोलन के दौरान अधिकाँश लोग अपने फटे-पुराने एवं उपयोग किये हुए वस्त्रों को इस टोली के हवाले कर रहे ताकि विरोध स्वरुप विदेशी वस्त्रों की सार्वजनकि होली जलाई जा सके| परन्तु दुलारी ने बिना किसी मोह/लालच के महंगे विदेशी वस्त्रों को इस सार्वजनिक होली में फेंक दिया| उसने उन्हें फेंकने से पहले एक बार भी नहीं सोचा की वे बहुत महंगे हैं अथवा बहुत सुन्दर हैं| दुलारी के मन में देशप्रेम की भावना घर कर गयी थी और वह तन-मन और धन से आजादी के आन्दोलन में शामिल हो गयी थी| इस आजादी के आन्दोलन में शामिल होने एवं इसमें अपना पूर्ण योगदान देने के सामने उन साड़ियों का कोई मोल नहीं था|
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