‘एही ठैयाँ झुलनी हैरानी हो रामा।‘ का प्रतीकार्थ समझाए।
इस कथन का शाब्दिक अर्थ है- इसी स्थान पर मेरी नाक की झुलनी(लौंग) खो गई है| दुलारी के इस कथन का अभिप्राय यह है कि थाने में आकर मेरी नाक की लौंग खो गयी है इसके माध्यम से वह यह कहने की कोशिश कर रही है कि थाने में आकर मेरी प्रतिष्ठा खो गयी है अथवा प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है| थाने वालों ने दुलारी की इच्छा के विपरीत उसे थाने में आकर गाने के लिए मजबूर किया था| इसी कारण उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची|
जबकि इसका दूसरा अर्थ यह है- लौंग को पारंपरिक रूप से सुहाग की निशानी समझा जाता है| दुलारी ने मन से टुन्नू को अपने सुहाग के रूप में स्वीकार कर लिया था| थाने में अली सगीर द्वारा टुन्नू पर बूट से प्रहार करने पर टुन्नू की मृत्यु हो गयी थी तो इसके माध्यम से दुलारी यह भी कहना चाह रही थी कि मेरा सुहाग टुन्नू यहीं पर मार दिया गया है अब मैं उसे कहाँ ढूँढूं|
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