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दुलारी और टुन्नू के प्रेम के पीछे उनका कलाकार मन और उनकी कला थी? यह प्रेम दुलारी को देश प्रेम तक कैसे पहुँचाता है?

टुन्नू एक सोलह साल का युवक था जबकि दुलारी एक वयस्क महिला थी| दोनों के बीच एक ही समानता थी जो उन्हें जोडती थी और जो उनके बीच में प्रेम उत्पन्न होने का कारण बनी वह समानता थी दोनों का काव्य एवं गायन के प्रति लगाव| दुलारी एवं टुन्नू दोनों ही कजली गायक थे| दुलारी एवं टुन्नू दोनों को कला से बहुत प्रेम था और एक बार कजली दंगल के दौरान उनकी मुलाक़ात हुई और उस मुकाबले में उन दोनों ने एक दूसरे के ह्रदय को भीतर तक प्रभावित किया| टुन्नू एवं दुलारी का एक दूसरे के प्रति लगाव शारीरिक न होकर कला आधारित था| दोनों ही एक दूसरे की कला का बहुत सम्मान करते थे और उनके बीच प्रेम जगाने में कला ने सेतु का कार्य किया|


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दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था-‘‘तैं सरबउला बोल जिन्नगी में कब देखले लोट?---!’’ दुलारी के इस आपेक्ष में के युवा वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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भारत के स्वाधीनता आंदोलन में दुलारी और टुन्नू ने अपना योगदान किस प्रकार दिया?

9

जलाए जाने वाले विदेशी वस्त्रों के ढेर में अधिकांश वस्त्र फटे-पुराने थे परंतु दुलारी द्वारा विदेशी मिलों में बनी कोरी साड़ियों का फेंका जाना उसकी किस मानसिकता को दर्शाता है?

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मन पर किसी का बस नहीं; वह रूप या उमर का कायल नहीं होता।“ टुन्नू के इस कथन मे उसका दुलारी के प्रति किशोर जनित प्रेम व्यक्त हुआ हैं परंतु उसके विवेक ने उसके प्रेम को किस दिशा की ओर मोङा?