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लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं?

लक्ष्मण ने वीर योद्धा की इस प्रकार विशेषता बताई कि वीर योद्धा रणभूमि में अपनी वीरता का प्रदर्शन करते हैं। वे अपने रणकौशल को युद्धभूमि में प्रदर्शित किया जाना ही उचित समझते हैं। वे इस हेतु शक्ति एकत्रित करते हैं और अपनी उर्जा को व्यर्थ में बखान कर नहीं गंवाते हैं। इसके अलावा लक्ष्मण वीर योद्धा की विशेषताओं में उसका ब्राह्मणों, देवताओं, गाय और ईश्वर के भक्तों के प्रति उदार होना भी बताते हैं। लक्ष्मण की नजर में वीर योद्धा स्वभाव से काफी शांत होते हैं। उनमें विनम्रता कूट-कूट कर भरी होती है। उनमें धैर्य भी काफी होता है। इससे यह अर्थ भी सामने निकलकर आता है कि धैर्य तो अंतिम रुप से विजय मिल जाने तक योद्धा को धारण करना ही पड़ता है। इसके अलावा लक्ष्मण वीर योद्धा की अन्य विशेषताओं में उसका क्षोभरहित या कहें क्लेश रहित या विकार रहित होना भी एक जरूरत मानते हैं।


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3

लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

4

परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए-

बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वहिदित श्रत्रियकुल द्रोही।।


भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही।।


सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा।।


मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।


गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर।।

6

साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथहन पर अपने विचार लिखिए।

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भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी।


अहो मुनीसु महाभट मानी।।


(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं।


जे तरजनी देखि मरि जाहीं।।


(ग) गाधिसूनु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।


अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ।।