Q10 of 16 Page 14

निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए-

(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही।


(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।


(ग) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।


बार बार मोहि लागि बोलावा।।


(घ) लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।


बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु।।

(क) ‘बालक बोलि बधौं नहिं तोही’ में ‘ब’ वर्ग की आवृत्ति होने पर अनुप्रसास अलंकार है।

(ख) ‘‘कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।’’ उपमेय ‘बचन’ की उपमान ‘कुलिस’ से समानता दिखाने पर यहाँ उपमा अलंकार है। ‘कोटि कुलिस’ में ‘क’ वर्ग की आवृत्ति होने से अनुप्रास अलंकार भी है।


(ग) ‘‘तुम्ह तो कालु हाँक जनु लावा’’


यहाँ उत्प्रेक्षा वाचक शब्द ‘जनु’ से उत्प्रेक्षा-अलंकार है।


‘‘बार-बार मोहि लागि बोलावा’’ में बार-बार शब्द की आवृत्ति होने पर पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।


(घ) ‘लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु’ में उपमावाचक शब्द ‘सरिस’ के प्रयोग से उपमा अलंकार


More from this chapter

All 16 →
8

पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

9

इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

11

‘‘सामाजिक जीवन में क्रोध की जरूरत बराबर पड़ती है। यदि क्रोध न हो तो मनुष्य दूसरे के द्वारा पहुँचाए जाने वाले बहुत से कष्टों की चिर-निवृत्ति का उपाय ही न कर सके।’’

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का यह कथन इस बात की पुष्टि करता है कि क्रोध हमेशा नकारात्मक भाव लिए नहीं होता बल्कि कभी-कभी सकारात्मक भी होता है। इसके पक्ष या विपक्ष में अपना मत प्रकट कीजिए।

12

संकलित अंश में राम का व्यवहार विनयपूर्ण और संयत है, लक्ष्मण लगातार व्यंग्य बाणों का उपयोग करते हैं और परशुराम का व्यवहार क्रोध से भरा हुआ है। आप अपने आपको इस परिस्थिति में रखकर लिखें कि आपका व्यवहार कैसा होता।