दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।
अन्य कवियों से इतर कवि देव जी ने ऋतुराज बसंत को कामदेव का पुत्र मानकर दूसरे कवित्त को लिखा है। प्रायः बसंत का वर्णन चारों ओर की हरियाली, शीतल हवाओं का बहना, मौसम की अद्भुत छटा, नायक-नायिकाओं के मिलाप और फूलों का खिलना आदि से किया जाता है, परन्तु दूसरे कवित्त में ऋतुराज बसंत को कामदेव के पुत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पुत्र बसंत के लिए डालियों का पालना, नव-पल्लवों का बिछौना, मोर-शिशु संवाद, कोयल के द्वारा शिशु को प्रसन्न करने का प्रयास करना, नायिका द्वारा शिशु की नजर उतारना, गुलाब के द्वारा प्रातः चुटकी बजाकर जगाना आदि रूप अन्य कवियों की सोच का परिष्कृत रूप है। कवि देव ने समस्त प्राकृतिक उपादानों को बालक बसंत के लालन-पालन में सहायक बताया है। इस प्रकार इसमें दो राय बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए कि कवि देव द्वारा ऋतुराज बसंत का बाल रूप में वर्णन परंपरागत बसंत से सर्वथा भिन्न है।
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