Q10 of 12 Page 23

आप अपने घर की छत से पूर्णिमा की रात देखिए तथा उसके सौंदर्य को अपनी कलम से

शब्दबद्ध कीजिए।

पूर्णिमा की रात, चाँद पूरे यौवन पर, दिन की तपिस के बाद रात की शीतलता का अनुभव, एकांत, नीरव छत। ये सब हिंदी फिल्मों में नायक नायिका में मिलन को दिखाने के लिए ज्यादा प्रयोग किया जाता है लेकिन फिर भी आप कभी मध्य रात्रि में छत पर जाइये। एक अलग ही सुकून मिलेगा आपको। दिन भर के धक्के, शोर-शराबे के बाद आप अपने लिए समय निकाल पाएंगे। रात का सन्नाटा आपको डरायेगा भी और कहीं न कहीं सुकून भी देगा। सिर्फ चन्द्रमा को देखकर आप उसकी सुंदरता का वर्णन बिलकुल भी नहीं कर सकते। हाँ उसकी सुंदरता का वर्णन करने के लिए आपको अपनी नायिका की भी जरूरत होगी। फिर चाहे वो कोरी कल्पना ही क्यों न हो। हिंदी फिल्मो में ऐसे तमाम गानें आपको मिल जाएंगे जिसमे चन्द्रमा को आधार बनाकर नायिका की सुंदरता का वर्णन किया गया है। कुछ पुरानी और बचपन की यादें भी ताजा हो जाएँगी, जैसे की छत पर सोना, चाँद को देखते रहना, तारे गिनना, भाई-बहन के साथ इस बात के लिए लड़ाई करना की ध्रुव तारा किधर निकलता है। इन सब यादों के बीच नींद कब आ गयी आपको पता भी नहीं चलेगा।


More from this chapter

All 12 →