‘प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद’- इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ
कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
कवि देव की कल्पना में आकाश एक दर्पण के समान है और आकाश में चमकते हुए चाँद में उन्हें राधारानी का प्रतिबिम्ब दिखता है। राधारानी का सौंदर्य, चाँद के सौंदर्य से कहीं ज्यादा अधिक है। कवि के अनुसार चाँद भी राधारानी के सुंदरता के सामने फीका नजर आ रहा है। यहां पर राधारानी की तुलना चांद से की तो गयी है परन्तु राधारानी को चाँद से ज्यादा सुन्दर बताया गया है। अतः यहां पर व्यतिरेक अलंकार है, न की उपमा।
व्यतिरेक अलंकार- जहाँ प्रस्तुत (उपमेय) की तुलना अप्रस्तुत (उपमान) से की जाती है, किंतु उपमेय, उपमान से अपेक्षाकृत हीन हो तो व्यतिरेक अलंकार होता है।
उपमा अलंकार- जब किसी दो वस्तुओं के गुण, आकृति, स्वभाव आदि में समानता दिखाई जाए या दो भिन्न वस्तुओं कि तुलना कि जाए, तब वहां पर उपमा अलंकर होता है।
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