‘प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी है’-इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति में कवि देव ने बसंत ऋतु की सुबह के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन किया है। बसंत ऋतु में जब गुलाब के फूल पर सूर्य की किरणे पड़ती है तो उसकी पंखुड़ियां खिल उठती हैं और ऐसा लगता है कि ये पंखुड़ियां बालक बसंत को बड़े ही स्नेह से जगा रहीं हो। ठीक वैसे ही जैसे घर के सदस्य बच्चो के बालों में ऊँगली से कंघी करके या उनके कानों के पास धीरे से चुटकी बजाकर उन्हें जागते हैं।
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