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पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर प्रदेश के इटावा में जन्मे कवि देव रीतिकाल के प्रभावशाली कवियों में से एक थे। इनका पूरा नाम देवदत्त द्विवेदी था। अलंकारिता एवं श्रृंगारिता का सम्यक प्रस्तुतीकरण इनके काव्य की प्रमुख विशेषता है।

पठित कविताओं के आधार पर स्पष्ट है कि इनमें नवीन कल्पनाओं के नए आयाम हैं। इनके आधार पर उनकी काव्यगत विशेषताएँ इस प्रकार हैं-


(क) कविताओं में रीतिकालीन कवियों की स्पष्ट छाप है। रीतिकालीन दरबारी कवियों की तरह कवि ने वैभव-सौंदर्य का वर्णन किया है।


(ख) भाषा में मधुरता दिखती है।


(ग) कवि ने प्रकृति-सौंदर्य वर्णन में नए-नए उपमान दिए हैं।


(घ) उनके काव्य में ब्रज भाषा की मंजुलता है, उसमें परिमार्जित शब्दों का भी यथा-स्थान प्रयोग देखने को मिलता है।


(च) तत्सम शब्दों का प्रयोग काव्य की शोभा को बढ़ाता है।


(छ) मानवीकरण, अनुप्रास, रूपक एवं उपमा अलंकारों का प्रयोग काव्य की सुंदरता में चार-चाँद लगा देता है।


(ज) प्रकृति का वर्णन परंपरा से हटकर देखने को मिलता है। ऋतुराज बसंत को शिशु के रूप में प्रस्तुत करना इसका उदाहरण है।


(झ) उनका काव्य सवैया और कवित्त में है, जिसमें स्वर प्रकट हैं।


(ट) वर्णित नायिका के सौंदर्य पर उपमानों की बौछार करके भी कवि को लगता है कि नायिका का वर्णन अभी अधूरा है। जल्दी में ये भूल जाता है और व्यतिरेक कर बैठता है जिससे वर्णित नायिका की तुलना में उपमान प्रभावी हो गया है।


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