‘छाया’शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?
छाया शब्द से तात्पर्य जीवन की बीती हुयी स्मृतियों से है। कवि के अनुसार हमारे जीवन में सुख और दुःख कभी भी हमेशा के लिए नहीं होता परन्तु उनकी मधुर व कड़वी यादें हमारे दिमाग में स्मृति स्वरुप सुरक्षित रहती हैं। जीवन में सुखद क्षणों की स्मृतियाँ मनुष्य को दिग्भ्रमित करती हैं। ये मधुर स्मृति हमें कमजोर बना कर हमारे दुःख को और ज्यादा कष्टदायक बना देती हैं। कवि ने यह समझाने का प्रयास किया है कि जितना अतीत के सुखद क्षणों को याद करेंगे, उतना ही वर्तमान की विषमताओं को मजबूत करेंगे और जीवन बोझिल होता चला जाएगा। अतः कवि ने ऐसी छाया को छूने के लिए पुरजोर तरीके से मना किया है।
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