‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।
यद्यपि समयानुसार प्राप्त उपलब्धि का महत्व विशेष ही होता है, किंतु उपलब्धि समय पर न मिलकर देर से मिलती है तो सांत्वना अवश्य प्रदान करती है। उपलब्धियों का मानव मन पर समयानुसार अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। कभी कभी देर से मिली उपलब्धि हमारे जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालती हैं और हमारे संघर्ष को सफल बनती हैं। दूसरी तरफ कभी-कभी ऐसा भी होता है कि देर से मिली उपलब्धि उपहास का कारण बन जाती है क्यों कि उसका किंचित भी औचित्य नहीं होता है। वह साँप निकल जाने पर लकीर पीटने जैसे होती है। ‘‘का वर्षा जब कृषि सुखाने” जैसा रोना होता है। अर्थात ऐसी बारिश का क्या फायदा जब खेत सूख गए हो, फसल बेकार हो चुकी हो। विवाह-उत्सव के पूर्ण हो जाने पर बाजे वालों का आना उपहास का कारण बनता है। वहीं निर्दोष व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने पर जीवन के अंत में न्यायालय द्वारा दोष-मुक्त किया जाना उसे सांत्वना प्रदान करता है। स्वतंत्रता-सेनानियों ने जीवन के अंत में स्वतंत्र-भारत में अंतिम-साँसें लीं, तब उन्हें प्रसन्नता की पूर्ण अनुभूति हुई। ज्यादातर उपलब्धियां हमेशा मनुष्य को आनंद ही देती हैं।
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