नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
नवाब साहब के सामने दो ताजे चिकने खीरे तौलिये पर रखे थे। नवाब साहब सामने बैठे लेखक को देख अपने संकोच को दूर करते हुए कुछ नए अंदाज में खीरा काटने की प्रक्रिया अपनाते हैं। बर्थ के नीचे रखे पानी से भरे लोटे को लेकर खिड़की से बाहर खीरों को अच्छी तरह धोते तथा तौलिये से पोंछते है। जेब से चाकू निकालकर खीरे के सिर को काटकर और गोदकर झाग निकालते हैं। खीरों को छीलकर फाँके बनाते हैं। कटी हुई फाँकों पर जीरा, नमक और काली मिर्च को बुरकते हैं। नबाब साहब खीरे की एक फाँक को उठाकर होठों तक ले जाते हैं, उसको सूँघते है। खीरे के स्वाद के आनंद में उनकी पलकें मूँद जाती है। मुँह में पानी भर आता है।
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