क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।
सनक सवार हो जाना अर्थात् जनून छा जाना अर्थात् धुन का पक्का होना। यदि किसी व्यक्ति में लगन, मेहनत तथा ईमानदारी से काम करने की सनक हो तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमने ऐसे कई वैज्ञानिकों, महापुरुषों तथा ज्ञानी व्यक्तियों के बारे में सुना है जो दिन रात मेहनत करने पर सफल हुए हैं। सवित्रीबाई फुले, रानी लक्ष्मी बाईं, कल्पना चावला आदी महिलाओं ने अपनी सनक को सकारात्मक रूप से लेने के कारण ही इतिहास में अपना नाम दर्ज किया है| ऐसी सापेक्ष सनक सकारात्मक होती है। उसके परिणाम अच्छे निकलते हैं।
सावित्रीबाई फुले के कारण ही आज महिलाएं शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। जब उस दौर में महिलाओं की शिक्षा पर पाबंदी थी उस दौर में भी सवित्रीबाई फुले ने संघर्ष करते हुए, लोगों के ताने तथा समाज का दबाव सहते हुए अपनी सनक को अपनी शक्ति बना कर सफलता प्राप्त की और महिलाओं के जीवन को मंगलमय बना दिया।
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