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क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।

सनक सवार हो जाना अर्थात् जनून छा जाना अर्थात् धुन का पक्का होना। यदि किसी व्यक्ति में लगन, मेहनत तथा ईमानदारी से काम करने की सनक हो तो इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमने ऐसे कई वैज्ञानिकों, महापुरुषों तथा ज्ञानी व्यक्तियों के बारे में सुना है जो दिन रात मेहनत करने पर सफल हुए हैं। सवित्रीबाई फुले, रानी लक्ष्मी बाईं, कल्पना चावला आदी महिलाओं ने अपनी सनक को सकारात्मक रूप से लेने के कारण ही इतिहास में अपना नाम दर्ज किया है| ऐसी सापेक्ष सनक सकारात्मक होती है। उसके परिणाम अच्छे निकलते हैं।

सावित्रीबाई फुले के कारण ही आज महिलाएं शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं। जब उस दौर में महिलाओं की शिक्षा पर पाबंदी थी उस दौर में भी सवित्रीबाई फुले ने संघर्ष करते हुए, लोगों के ताने तथा समाज का दबाव सहते हुए अपनी सनक को अपनी शक्ति बना कर सफलता प्राप्त की और महिलाओं के जीवन को मंगलमय बना दिया।


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नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।

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किन-किन चीजों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयार करते हैं?

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खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा। किसी एक के बारे में लिखिए।

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निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए-

(क) एक सप़फ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।


(ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।


(ग) खाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।


(घ) अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।


(ड़) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।


(च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा।


(छ) रवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।


(ज) जेब से चाकू निकाला।