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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

पतंगा अपने क्षोभ को किस प्रकार व्यक्त कर रहा हैं?

यहाँ कवयित्री पतंगों की तुलना संसार के मनुष्यों से कर रही हैं। कवयित्री का मानना है कि संसार के लोगों का क्षोभ अपने मन को दीपक की तरह नहीं जला पाने को लेकर है। संसार के कुछ लोग अपने अहंकार के कारण अपने मन रूपी दीपक को ईश्वर की भक्ति में जला नहीं पाये हैं। ये पतंगे इस हेतु पश्चाताप भी कर रहे हैं कि वो अपनी आस्था को ईश्वर भक्ति के प्रति अक्षुण्ण या अपरिवर्तित क्यों नहीं रख पाये। संसार रूपी पतंगा प्रभु भक्ति के अवसर को गँवा देने पर पश्चाताप कर रहा है और इस प्रकार अपना सिर धुन-धुन कर अपना क्षोभ व्यक्त कर रहा है।


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं?

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से क्यों प्रतीत हो रहे हैं?

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

कवयित्री ने दीपक को हर बार अलग-अलग तरह से मधुर-मधुर, पुलक-पुलक, सिहर-सिहर और विहँस-विहँस जलने को क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


जलते नभ में देख असंख्यक,


स्नेहहीन नित कितने दीपक;


जलमय सागर का उर जलता,


विद्युत ले घिरता है बादल!


विहँस-विहँस मेरे दीपक जल!


(क) ‘स्नेहहीन दीपक’ से क्या तात्पर्य है?


(ख) सागर को ‘जलमय’ कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है?


(ग) बादलों की क्या विशेषता बताई गई है?


(घ) कवयित्री दीपक को ‘विहँस-विहँस’ जलने के लिए क्यों कह रही हैं?