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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिये-

मृदुल मोम-सा घुल रे मृदु तन!

यहाँ कवयित्री अपने तन-मन को मोम की तरह घुलने या गलाने का आह्वान करती हैं। ऐसा वे प्रभु भक्ति को पाने के लिए आवश्यक मानती हैं। उनका मानना है कि अपने अहंकार को मोम की तरह गला देने पर ही हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं। यह अहंकार ईश्वर को प्राप्त करने में हमारा बाधक बनता है। इसिलिए कवयित्री इसे गला देने का प्रभु से आह्वान करती हैं।


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

क्या मीराबाई और आधुनिक मीरा ‘महादेवी वर्मा’ इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने के लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं, उनमें आपको कुछ समानता या अंतर प्रतीत होता है? अपने विचार प्रकट कीजिए।

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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिये-

दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,


तेरे जीवन का अणु गल गल!

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निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिये-

युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,


प्रियतम का पथ आलोकित कर!

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कविता में जब एक शब्द बार-बार आता है और वह योजक चिह्न द्वारा जुड़ा होता है, तो वहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है; जैसे- पुलक-पुलक। इसी प्रकार के कुछ और शब्द खोजिए जिनमें यह अलंकार हो।