घऱ वालों के मना करने पर भी टोपी का लगाव इफ्फान के घऱ और उसकी दादी से क्यों था?
दोनों के अनजान, अटूट रिश्ते के बारे में मानवीय मूल्यों की दृष्टि से अपने विचार लिखिए।
इफ्फन और टोपी शुक्ला अलग-अलग मजहब के थे। इसके बावजूद दोनों पक्के दोस्त थे। उनकी दोस्ती के बीच में मजहब की दीवार नहीं आ पाई। दोनों प्रेम के अटूट बंधन में बंधे थे। इफ्फन के बिना टोपी अधूरा सा था। जब इफ्फन के पिता का तबादला हुआ तो टोपी बिल्कुल अकेला रह गया था। इसके बाद वो कभी कोई मित्र नहीं बना पाया। आज के समय में ऐसी निस्वार्थ दोस्ती कम ही देखने को मिलती है। अगर ऐसी दोस्ती इस जमाने में हो जाए तो इंसान का जीवन ही बदल जाए। इस स्वार्थी दुनिया में सच्चा दोस्त मिलना बहुत मुश्किल है। वर्तमान समय में ऐसे ही सच्चे और अच्छे लोगों को देश की जरूरत है।
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