हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाई लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती को इस प्रतिक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें।
मेरे विचार में अत्याचार करने से ज्यादा उसे सहने वाला दोषी होता है इस कहानी में हीरा और मोती पर बहुत अत्याचार किए गए, उनका शोषण किया गया। परन्तु हीरा और मोती ने इसे चुपचाप सहने के बजाए इसके विरुद्ध आवाज़ उठाई, भले ही इसके लिए उन्हें प्रताड़ना सहनी पड़ी तथा बहुत सारे अन्य प्रकार के कष्टों का सामना भी करना पड़ा। शोषित रहकर घुट-घुटकर जीने तथा हर साँस के लिए दूसरे पर आश्रित रहने से अच्छा है की उस परिस्थिति का विरोध किया जाए और उससे बाहर निकलने के रास्ता निकाला जाए। इससे शोषक अपनी मनमर्जी नहीं कर पाता है और संभव है हम भी उस समस्या से बाहर निकल सकते हैं|
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