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हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाई लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती को इस प्रतिक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें।

मेरे विचार में अत्याचार करने से ज्यादा उसे सहने वाला दोषी होता है इस कहानी में हीरा और मोती पर बहुत अत्याचार किए गए, उनका शोषण किया गया। परन्तु हीरा और मोती ने इसे चुपचाप सहने के बजाए इसके विरुद्ध आवाज़ उठाई, भले ही इसके लिए उन्हें प्रताड़ना सहनी पड़ी तथा बहुत सारे अन्य प्रकार के कष्टों का सामना भी करना पड़ा। शोषित रहकर घुट-घुटकर जीने तथा हर साँस के लिए दूसरे पर आश्रित रहने से अच्छा है की उस परिस्थिति का विरोध किया जाए और उससे बाहर निकलने के रास्ता निकाला जाए। इससे शोषक अपनी मनमर्जी नहीं कर पाता है और संभव है हम भी उस समस्या से बाहर निकल सकते हैं|


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आशय स्पष्ट कीजिए-

(क) अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।


(ख) उस एक रोटी से उनकी भूख तो क्या शांत होती; पर दोनों के हृदय को मानो भोजन मिल गया।

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गया ने हीरा-मोती को दोनों बार सूखा भूसा खाने के लिए दिया क्योंकि-

(क) गया पराये बैलों पर अधिक खर्च नहीं करना चाहता था।


(ख) गरीबी के कारण खली आदि खरीदना उसके बस की बात न थी।


(ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुःखी था।


(घ) उसे खली आदि सामग्री की जानकारी न थी।


(सही उत्तर के आगे (â) का निशान लगाइए।)

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क्या आपको लगता है कि यह कहानी आज़ादी की लड़ाई की ओर भी संकेत करती है?

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वह इतना ही काफी है।

फिर मैं भी ज़ोर लगाता हूँ।


‘ही’, ‘भी’ वाक्य में किसी बात पर ज़ोर देने का काम कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को निपात कहते हैं। कहानी में से पाँच ऐसे वाक्य छाँटिए जिनमें निपात का प्रयोग हुआ हो।