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मैना की अंतिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भरकर रो ले लेकिन पाषाण हृदय वाले जनरल ने किस भय से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी?

मैना की अंतिम इच्छा थी कि वह उस प्रासाद पर बैठकर जी भरकर रोना चाहती है परंतु क्रूर हृदयवाले जनरल अउटरम ने उसकी इच्छा पूरी न होने दी क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं मैना भी नाना साहब की तरह भाग न जाए। यदि मैना भी भाग जाती तो जनरल अउटरम की नौकरी जा सकती थी। नाना साहब से जुड़ी हुई हर चीज को नष्ट कर देना ब्रिटिश सरकार का आदेश था। जनरल अउटरम ने मैना को तुरंत हथकड़ी पहना दी क्योंकि पहले पहल की तलाशी लेने पर उसे मैना कहीं नहीं मिली पाई थी।


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