Q7 of 11 Page 56

स्वाधीनता आंदोलन को आगे बढ़ाने में इस प्रकार के लेखन की क्या भूमिका रही होगी?

ऐसे लेखों से स्वाधीनता आंदोलन में भाग लेने वाले लोगों को अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए आत्म बलिदान देने की प्रेरणा प्राप्त होती होगी एवं राष्ट्रप्रेम की भावना बलवती हो उठती होगी। इन लेखों को पढ़कर जनसमूह अंग्रेजों की निर्दयता से परिचित होकर उसके विरोध से भर जाता होगा। अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना उनके मन में भी जागकर उनमें जोश भर देती होगी| अनेक भारतवासी ऐसी लेखों को पढ़कर स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े होंगे। इसी कारण उन्होंने निडरता पूर्वक विदेशी शक्तियों का डटकर मुकाबला किया| इस प्रकार के लेखन से आम आदमी भी अपना सब कुछ न्यौछावर करने के लिए प्रेरित हो उठता है और अपने लक्ष्य को पूरा करने में सफलता प्राप्त करता है। इस तरह के लेखों ने स्वतंत्रता आन्दोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई होगी|


More from this chapter

All 11 →
5

बालिका मैना के चरित्र की कौन-कौन सी विशेषताएं आप अपनाना चाहेंगे और क्यों?

6

टाइम्स’ पत्र ने 6 सितंबर को लिखा था- ‘बड़े दुख का विषय है कि भारत सरकार आज तक उस दुर्दांत नाना साहब को नहीं पकड़ सकी।’ इस वाक्य में ‘भारत सरकार’ से क्या आशय है?

8

कल्पना कीजिए कि मैना के बलिदान की यह खबर आपको रेडियो पर प्रस्तुत करनी है। इन सूचनाओं के आधार पर आप एक रेडियो समाचार तैयार करें और कक्षा में भावपूर्ण शैली में पढ़ें।

9

इस पाठ में रिपोर्ताज के प्रारंभिक रूप् की झलक मिलती है लेकिन आज अखबारों में अधिकांश खबरें रिपोर्ताज की शैली में लिखी जाती हैं। आप-

(क) कोई दो खबरें किसी अखबार से काटकर अपनी कॉपी में चिपकाइए तथा कक्षा में पढ़कर सुनाए।


(ख) अपने आसपास की किसी घटना का वर्णन रिपोर्ताज शैली में कीजिए।