आपने यह व्यंग्य प्ढ़ा। इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बातें आकर्षित करती हैं?
मुझे इस व्यंग्य को पढ़कर सर्वप्रथम लेखक की विवेचना शक्ति का पता चलता है। जिस प्रकार लेखक ने प्रेमचंद के संपूर्ण व्यक्तित्व का आकलन उनके फटे जूते से किया है वह दुर्लभ है। प्रस्तुत व्यंग्य रचना में हम लेखक के शब्दों में कहानीकार प्रेमचंद के बायें पैर में फटे जूते पहनने को बड़े ही रोचक अंदाज में पाते हैं। यह बात पक्की है कि लेखक के मन में प्रेमचंद जी के प्रति सम्मान की भावना काफी है। वे उन्हें अपना पुरखा मानकर पहले तो उन्हें फटे जूते पहनने को लेकर उन्हें उलाहना भरे शब्द कहते हैं। वे प्रेमचंद को इस हेतु काफी कोसते हैं और उन्हें अप्रिय बात तक कह डालते हैं और अंत में वे प्रेमचंद के ऐसा करने यानि फटा जूता पहनने के पीछे छिपे राज को समझने का दावा भी करते हैं जिससे हमें उनके विवेकपूर्ण स्वभाव का पता भी चलता है। साथ ही उनका व्यंग्य अंधेरे में तीर नहीं चलाता है बल्कि अपनी तर्कपूर्ण सोच के आधार पर उनकी गंभीर व्यंग्य शैली को हमारे सामने प्रस्तुत करता है।
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