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कैलासशहर के जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी?

जब लेखक कैलासशहर पहुंचा तो उनकी मुलाकात वहां के जिलाधिकारी से हुई। यहां जिलाधिकारी ने लेखक को बताया कि आलू की बुआई के लिए आमतौर पर पारंपरिक आलू के बीजों की जरूरत दो मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर पड़ती है। इसके बरक्स टीपीएस की सिर्फ 100 ग्राम मात्रा ही एक हेक्टेयर की बुआई के लिए काफी होती है। त्रिपुरा से टीपीएस का निर्यात अब न सिर्फ असम, मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, बांग्लादेश, मलेशिया और वियतनाम को भी किया जा रहा है। इसके अलावा कलेक्टर ने अपने एक अधिकारी को लेखक को मुराई गांव ले जाने को कहा, जहां टीपीएस की खेती की जाती थी।


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