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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30) शब्दों में लिखिए-

रामन् के लिए नौकरी संबंधी कौन सा निर्णय कठिन था?

रामन् उस जमाने के हिसाब से सरकारी विभाग में एक प्रतिष्ठित अफसर के पद पर तैनात थे। उन्हें मोटी तनख्वाह और अन्य सरकारी सुख-सुविधाएँ मिलती थीं। जब आशुतोष मुखर्जी ने रामन् के समक्ष कलकत्ता विश्वविघालय में प्रोफ़ेसर के पद को ग्रहण करने का प्रस्ताव रखा तब रामन् के लिए नौकरी संबंधी यह निर्णय कठिन था। प्रोफ़ेसर की नौकरी की तुलना में उनकी सरकारी नौकरी ज़्यादा वेतन तथा सुख-सुविधाओं से भरी थी। इस प्रकार उस नौकरी को छोड़कर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर की नौकरी करने का फैसला बहुत कठिन था।


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