कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने के लिए कहता है, क्यों?
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित यह कविता एक आह्वाहन गीत है। निराला क्रांतिकारी स्वभाव के कवि थे। वे समाज में बदलाव के पक्षधर थे। प्रस्तुत कविता में कवि बादल से भीषण गर्जना के साथ घनघोर बारिश की अपील कर रहा है, जिसके स्वर में ओज है, क्रांति है। क्रांतिकारी कवि होने के नाते वह हमेशा क्रांति की ही अपेक्षा करता है और ऐसी अपेक्षा जिसकी गरजना सुनकर उत्साह का संचार हो जाये। दूसरी ओर बादलों की फुहार और रिमझिम वर्षा से व्यक्ति के मन में कोमल भावों का जन्म होता है, शांति का अनुभव होता है। ऐसे भावों से कवि के मन्तव्य को गति नहीं मिलती है। जन-मानस में चेतना और जोश जागृत करने के लिए, कवि बादल से फुहार या रिमझिम बारिश के लिए न कहकर 'गरजने' के लिए कहता है। गर्जना शब्द क्रांति एवं बदलाव को दर्शाता है।
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