प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
कविता “अट नहीं रही है” में निराला जी ने फागुन के सौन्दर्य और मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है जिसका वर्णन कवि ने निम्न रूपों में किया है-
(क) फागुन के प्राकृतिक सौंदर्य का प्रभाव सर्वत्र व्याप्त है, अर्थात घर-घर में फैला हुआ दिखाया है। जिसे विविध रंग के नव-पल्लवों, पुष्पों के रूप में पेड़ों पर देखा जा सकता है।
(ख) फागुन की प्रकृति का प्रभाव मनुष्यों के मन पर देखा जा सकता है। कवि तो प्रकृति के सौंदर्य से इतना प्रभावित है कि वह प्रकृति के दर्शन से तृप्त नहीं हो पा रहा है और अनंत काल के लिए प्रकृति की सुंदरता को अपनी आँखों में कैद कर लेना चाहता है।
(ग) फागुन का इतना प्रभाव है कि सर्वत्र उल्लास और उत्साह दिखाई देता है। प्रफुल्लता-ही-प्रफुल्लता दिखाई देती है।
(च) फागुन की इतनी अतिशय शोभा है कि कहीं भी समा नहीं रही है।
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