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फागुन में गाए जाने वाले गीत जैसे होरी, फाग आदि गीतों के बारे में जानिए।

निराला जी ने फागुन सौंदर्य पर कविता लिखी है। इस कविता में भी निराला फागुन के सौंदर्य में डूब गए हैं। उनमें फागुन की आभा रच गई है, ऐसी आभा जिसे शब्दों से अलग किया जा सकता है, फागुन से।


फूटे हैं आमों में बौर


भौंर वन-वन टूटे हैं।


होली मची ठौर-टौर,


सभी बंधन छूटे हैं।


फागुन के रंग राग,


बाग-वन फाग मचा है,


जनों के मन लूटे हैं।


माथे अबीर से लाल,


गाल सेंदुर के देखे,


आँखें हुई हैं गुलाल,


गेरू के ढेले कूटे हैं।


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