इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।
निराला जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। छायावाद की प्रमुख विशेषताएँ हैं-प्रकृति चित्रण और प्राकृतिक उपादानों का मानवीकरण। 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' दोनों ही कविताओं में प्राकृतिक उपादानों का चित्रण और मानवीकरण हुआ है। काव्य के दोनों पक्ष (भाव पक्ष और शिल्प पक्ष) सराहनीय हैं। छायावाद की अन्य विशेषताएँ जैसे गेयताछाया, प्रवाहमयता, अलंकार योजना आदि भी देखने को मिलती हैं। भाषा एक ओर जहाँ संस्कृतनिष्ठ, सामासिक और आलंकारिक है तो वहीं दूसरी ओर ठेठ ग्रामीण शब्दों का प्रयोग भी दर्शनीय है। भाषा सरल, सहज और प्रवाहमयी है। अतुकांत शैली का भी प्रयोग किया गया है। अन्य काव्य-शिल्प निम्नलिखित है-
(क) निराला की कविताओं में दूसरों से भिन्नता देखने को मिलती है। उनका शब्द-चयन ऐसा अनूठा है कि एक-एक शब्द में पूर्ण भाव की अभिव्यक्ति होती है।
(ख) प्रकृति के चित्रण में जीवंतता है। ‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ दोनों कविताओं में मानवीकरण है। कवि ‘उत्साह’कविता में बादल को संबोधित करता है-
बादल गरजो!
घेर-घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
इसी प्रकार ‘अट नहीं रही है’कविता में कवि फागुन से वार्ता कर रहा है-
कहीं साँस लेते हो,
घर-घर भर देते हो।
(ग) प्रतीकात्मक शब्दों का प्रयोग किया गया है। यह छायावादी कवियों की परंपरा रही है कि प्रतीक-शब्दों के प्रयोग से भावों को रहस्यमयी (गूढ़) बना देते हैं।
(घ) तत्सम शब्दों की अधिकता देखने को मिलती है।
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