कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
मनुष्य का एक स्वभाव यह भी होता है कि जब वह किसी अत्यंत खूबसूरत चीज या व्यक्ति को देख लेता है तो उसकी सुंदरता अनंत काल के लिए मनुष्य की आँखों पर टिक जाती है। ठीक इसी प्रकार कवि भी फाल्गुन की सुंदरता, उसकी मादकता और उसके यौवन के अधीन हो जाता है। प्रकृति प्रेमी कवि अपनी रूचि के अनुसार प्राकृतिक सौंदर्य ढूंढ लेता है, और चाहते हुए भी फाल्गुन की सुंदरता को अपनी आँखों से नहीं हटा पाता।
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