इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
सन् 1946-47 में पूरे देश में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ पूरे उफान पर था। हर तरफ़ जुलूस और नारे बाज़ी हो रही थी। स्वाधीनता आंदोलन के समय लोगों में इतना उत्साह था कि ऐसे माहौल में घर में बैठना संभव नहीं हो रहा था। इसी समय प्राध्यापिका शीला अग्रवाल की जोशीली बातों से लेखिका को प्रेरणा मिली। देश के प्रति अपने प्रेम के कारण वो खुदको नहीं रोक सकी और चल पड़ीं उसी आंदोलन की रहा पर। सभी कॉलेजों, स्कूलों, दुकानों के लिए हड़ताल का आह्वान किया। जो-जो हड़ताल नहीं कर रहे थे, छात्रों का एक बहुत बड़ा समूह वहाँ जाकर हड़ताल करवाता। लेखिका ने सबको जागरूक करने के लिए भाषण दिए, हाथ उठाकर नारे लगवाये एवं हड़ताले करवाने आदि में लेखिका ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
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