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इस आत्मकथ्य से हमें यह जानकारी मिलती है कि कैसे लेखिका का परिचय साहित्य की अच्छी पुस्तकों से हुआ। आप इस जानकारी का लाभ उठाते हुए अच्छी साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने का सिलसिला शुरू कर सकते हैं। कौन जानता है कि आप में से ही कोई अच्छा पाठक बनने के साथ-साथ अच्छा रचनाकार भी बन जाए।

लेखक बनने के लिए अच्छा पाठक होना बहुत आवश्यक होता है। किसी भी व्यक्ति के लेखक बनने की प्रक्रिया में सबसे पहले वह एक अच्छा पाठक बनता है, साहित्य पढ़ता है और अपनी पसंद के अनुसार और साहित्य पढ़ता है। साहित्य की भाषा, लेखन आदि के बारे में भी पाठक बनकर ही समझ सकता है, साहित्य के विशिष्ट क्षेत्र में अपनी रूचि विकसित कर सकते है। उसके पश्चात जब वह साहित्य के बारे में सारी जानकारियाँ एकत्रित कर लेता है तब वह एक अच्छा लेखक या रचनाकार बन सकता है।


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आप भी अपने दैनिक अनुभवों को डायरी में लिखिए।

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इस आत्मकथ्य में मुहावरों का प्रयोग करके लेखिका ने रचना को रोचक बनाया है। रेखांकित मुहावरों को ध्यान में रखकर कुछ और वाक्य बनाएँ-

(क) इस बीच पिता जी के एक निहायत दकियानूसी मित्र ने घर आकर अच्छी तरह पिता जी की लू उतारी।


(ख) वे तो आग लगाकर चले गए और पिता जी सारे दिन भभकते रहे।


(ग) बस अब यही रह गया है कि लोग घर आकर थू-थू करके चले जाए।


(घ) पत्र पढ़ते ही पिता जी आग-बबूला हो गए।

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लेखिका के बचपन के खेलों में लँगड़ी टाँग, पकड़म-पकड़ाई और काली-टीलो आदि शामिल थे। क्या आप भी यह खेल खेलते हैं। आपके परिवेश में इन खेलों के लिए कौन-से शब्द प्रचलन में हैं। इनके अतिरिक्त आप जो खेल खेलते हैं उन पर चर्चा कीजिए।

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स्वतंत्रता आन्दोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी रही है। उनके बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए और उनमें से किसी एक पर प्रोजेक्ट तैयार कीजिए।