शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
भारतरत्न, पद्मविभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत-रसिकों के हृदय और संगीत के नायक अमरुद्दीन उर्फ़ बिस्मिल्लाह खाँ जी का जन्म बिहार में डुमराँव के एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ था। इस कारण डुमराँव उनके संगीत तथा शहनाई के लिए प्रसिद्ध है। शहनाई की दुनिया में शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के पूरक बन गए क्योंकि बिस्मिल्लाह खाँ जी के पिता जी, दादा जी तथा परदादा जी भी शहनाई वादक और संगीत प्रेमी थे और वे अपने संगीत से सभी का मन मोहित कर देते थे। शहनाई बजाने के लिए जिस रीड का प्रयोग किया जाता है वह रीड नरकट (बेंत जाति का प्रसिद्ध पौधा) डुमराँव में सोन नदी के किनारे पर पाया जाता है। इसलिए शहनाई की दुनिया में डुमराँव को याद किया जाता है।
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