बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।
बिस्मिल्ला खाँ भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक माने जाते थे क्योंकि वे अपनी शहनाई कला के प्रति पूर्णतया समर्पित थे। उन्होंने जीवनभर संगीत को संपूर्णता, एकाधिकार व सच्चे मन से सीखने की इच्छा को अपने अंदर जिंदा रखा। उन्होंने अस्सी वर्ष के होने तक हमेशा पाँचो वक्त वाली नमाज में शहनाई के सच्चे सुर को पाने की दुआ करते थे।r वे नमाज के बाद सजदे में यही गिड़गिड़ाते थे- मेरे मालिक एक सुर वख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर दे कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ। खाँ साहब ने कभी भी धन-दौलत को पाने की इच्छा नहीं की बल्कि उन्होंने संगीत को ही सर्वश्रेष्ठ माना। वे अपने सुरों को पूर्ण नहीं मानते थे इसलिए हमेशा उनका यही प्रयास रहता था कि सुर में और अधिक प्रभाव हो इस कारण सुर को और सुधारने के लिए प्रयास करते थे और घंटों रियाज करके अपनी कला को सुधारने में लगे रहते थे। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि वे अपनी कला के अनन्य उपासक थे।
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