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बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।

बिस्मिल्ला खाँ भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक माने जाते थे क्योंकि वे अपनी शहनाई कला के प्रति पूर्णतया समर्पित थे। उन्होंने जीवनभर संगीत को संपूर्णता, एकाधिकार व सच्चे मन से सीखने की इच्छा को अपने अंदर जिंदा रखा। उन्होंने अस्सी वर्ष के होने तक हमेशा पाँचो वक्त वाली नमाज में शहनाई के सच्चे सुर को पाने की दुआ करते थे।r वे नमाज के बाद सजदे में यही गिड़गिड़ाते थे- मेरे मालिक एक सुर वख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर दे कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ। खाँ साहब ने कभी भी धन-दौलत को पाने की इच्छा नहीं की बल्कि उन्होंने संगीत को ही सर्वश्रेष्ठ माना। वे अपने सुरों को पूर्ण नहीं मानते थे इसलिए हमेशा उनका यही प्रयास रहता था कि सुर में और अधिक प्रभाव हो इस कारण सुर को और सुधारने के लिए प्रयास करते थे और घंटों रियाज करके अपनी कला को सुधारने में लगे रहते थे। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि वे अपनी कला के अनन्य उपासक थे।


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बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

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मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।

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निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए-

(क) यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।


(ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।


(ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यतः सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।


(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूँ हीह उन पर मेहरबान होगा।


(ड़) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।


(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।

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निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में बदलिए-

(क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।


(ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।


(ग) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।


(घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।