सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?
सुषिर-वाद्य अर्थात् फूँककर बजाए जाने वाले वाद्य। ऐसे वाद्य जिनमें नाड़ी होती है उन्हें अरब में ‘नय’ बोलते हैं। इस में छेद होता है और अंदर से ये वाद्य खोखले होते है। वैदिक इतिहास में शहनाई का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। इसे संगीत शास्त्रों के अंतर्गत सुषिर-वाद्यों में गिना जाता है। शहनाई एक अत्यंत मधुर स्वर उत्पन्न करने वाला वाद्य है। शहनाई में समस्त राग रागिनियों को आकर्षक सुरों में बाँधा जा सकता हैं। इसलिए शहनाई की तुलना में अन्य कोई सुषिर वाद्य नहीं टिकता और इसलिए शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि दी गई होगी।
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