‘हालाँकि उस वक्त मेरा भेष ऐसा नहीं था कि उन्हें कुछ भी ख्याल करना चाहिए था।’- उक्त कथन के अनुसार हमारे आचार-व्यवहार के तरीके वेशभूषा के आधार पर तय होते हैं। आपकी समझ से यह उचित है अथवा अनुचित, विचार व्यक्त करें।
आजकल लोग मन की सुंदरता से पहले तन की सुंदरता देखते थे। अगर किसी ने अच्छे कपड़े नहीं पहने होते तो उससे सीधे मुंह बात करना भी पसंद नहीं करते। लोगों में एक धारणा बन गई है कि पहली बार मिलने पर कपड़े ही व्यक्ति के बारे में बता देते हैं। कपड़ों के हिसाब से ही उसे मान—सम्मान दिया जाता है।
स्वयं लेखक को भी इन पस्थितियों से गुजरना पड़ा था। यह आवश्यक नहीं कि अच्छे कपड़े पहनने वाला बहुत अच्छा इंसान हो। अक्सर देखा गया है कि जो अच्छे कपड़े पहने होते हैं उनके मन मैले होते हैं। सस्ते तथा निम्न कपड़े से कोई व्यक्ति निम्नकोटि का नहीं हो जाता है। इसीलिये किसी व्यक्ति के सिर्फ कपडे देखकर उसके बारे में हमें धारणा नहीं बनानी चाहिए बल्कि उसके बारे में धारणा बनाते समय उसके चरित्र को प्राथमिकता देनी चाहिए|
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