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ऐसे शब्द जो किसी अंचलयानी क्षेत्र विशेष में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें आंचलिक शब्द कहा जाता है। प्रस्तुत पाठ में से आंचलिक शब्द ढूँढ़कर लिखिए।

पाठ में आए हुए आंचलिक शब्द—, चोडी, खोटी, राहदारी, छड्, थोड्ला, डांड़ा, कुची-कुची, लड्कोर, कंडे, भीटा, थुक्पा, गाँव-गिराँव, भरिया, गंडा, तिड्री, कन्जुर।

ये सभी शब्द आंचलिक शब्द हैं। आंचलिक शब्द ऐसे शब्द होते हैं जिन्हें किसी विशेष क्षेत्र, स्थान आदि के लोगों के द्वारा बोलचाल के दौरान उपयोग किया जाता है| ये जो शब्द इस पाठ में आये हैं उन्हें तिब्बत क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किया जाता है|


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आपने भी किसी स्थान की यात्रा अवश्य की होगी? यात्रा के दौरान हुए अनुभवों को लिखकर प्रस्तुत करें।

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यात्रा-वृत्तांत गद्य साहित्य की एक विधा है। आपकी इस पाठ्यपुस्तक में कौन-कौन सी विधाएँ हैं? प्रस्तुत विधा उनसे किन मायनों में अलग है?

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किसी बात को अनेक प्रकार से कहा जा सकता है, जैसे-

सुबह होने से पहले हम गाँव में थे।


पौ फटने वाली थी कि हम गाँव में थे।


तारों की छाँव रहते-रहते हम गाँव पहुँच गए।


नीचे दिए गए वाक्य को अलग-अलग तरीके से लिखिए-


जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे।

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पाठ में कागज़, अक्षर, मैदान के आगे क्रमशः मोटे, अच्छे और विशाल शब्दों का प्रयोग हुआ है। इन शब्दों से उनकी विशेषता उभर कर आती है। पाठ में से कुछ ऐसे ही और शब्द छाँटिए जो किसी की विशेषता बता रहे हों।